
रूह रोई तो रब मिला
रूह रोई तो रब मिला
दर्द में ही सुकून मिला
जिसे अपना समझ बैठे थे
वो तो बस एक इम्तिहान निकला
टूट के जब सजदे में गिरे
आंसू बनके जब अल्फाज बहे
तब समझाया इस इश्क में
रब ही सबसे करीब रहे
जिसे मोहब्बत समझ बैठे थे
वो तो रूह का सफर निकला
जिसे अपना खुदा बनाया था
वो खुदा तक पहुंचने का जरिया
रूह रोई तो रब मिला
दर्द में ही सब्र मिला
इश्क ने जब तोड़ा मुझे
तब जाके मेरा खुदा मिला
रूह रोई तो रब मिला
आंसुओं में ही सुकून मिला
टूटे दिल ने ये सीख लिया
रब के बिना कुछ भी ना मिला
जिसे दुआओं में मांगा था
वही सबसे दूर निकला।
जिसे जन्नत समझ बैठे थे
वहीं सबसे बड़ा गम निकला।
मैंने हर सांस तुझ पर लिख दी।
तूने हर सांस को दर्द बना दिया।
मैंने इश्क को इबादत जाना।
तूने इश्क को खेल बना दिया।
अब शिकवा नहीं किसी से
ना कोई सवाल रब से।
जो छीना उसने वहीं दिया।
सब कुछ उसी के हिसाब से
रूह रोई तो रब मिला
दर्द में ही सन्न मिला
इश्क ने जब तोड़ा मुझे
तब जाके मेरा खुदा मिला
रूह रोई तो रब मिला
आंसुओं में ही सुकून मिला
टूटे दिल ने ये सीख लिया
रब के बिना कुछ भी ना मिला
जब दुनिया ने छोड़ा हाथ मेरा
तब रब ने थामा दिल मेरा
जिसे सबसे बड़ा नुकसान समझा
वही तो सबसे बड़ा हासिल था।
जिस दिन तुझसे दूर हुआ
उसी दिन खुद से करीब हुआ।
इश्क से रब तक का जो रास्ता है
वो दर्द से ही शुरू हुआ।
रूह रोई तो रब मिला।
खामोशी में जवाब मिला।
जो इश्क में हार गया था
वो सजदे में जीत गया।
रूह रोई तो रब मिला।
टूट के भी दिल संभल गया।
अब किसी से कोई गिला नहीं
क्योंकि रब मुझे मिल गया।
जिसे खोकर सब कुछ खोया
लगा उसे खोकर ही सब कुछ पाया
रूह रोई और उसी रोने में
रब मिल गया
रुह रोई तो रब मिला
रूह रोई तो रब मिला
दर्द में ही सुकून मिला
जिसे अपना समझ बैठे थे
वो तो बस एक इम्तिहान निकला
टूट के जब सजदे में गिरे आंसू बनके
जब अल्फाज बहे तब समझ आया
इस इश्क में रब ही सबसे करीब रहे।
जिसे मोहब्बत समझ बैठे थे
वो तो रूह का सफर निकला।
जिसे अपना खुदा बनाया था
वो खुदा तक पहुंचने का जरिया निकला।
रूह रोई तो रब मिला।
दर्द में ही सब्र मिला।
इश्क ने जब तोड़ा मुझे
तब जाके मेरा खुदा मिला।
रूह रोई तो रब मिला।
आंसुओं में ही सुकून मिला।
टूटे दिल ने ये सीख लिया।
रब के बिना कुछ भी ना मिला।
जिसे दुआओं में मांगा था
वही सबसे दूर निकला।
जिसे जन्नत समझ बैठे थे।
वही सबसे बड़ा गम निकला।
मैंने हर सांस तुझ पर लिख दी।
तूने हर सांस को दर्द बना दिया।
मैंने इश्क को इबादत जाना।
तूने इश्क को खेल बना दिया।
अब शिकवा नहीं किसी से
ना कोई सवाल रब से।
जो छीना उसने वही दिया।
सब कुछ उसी के हिसाब से।
रूह रोई तो रब मिला।
दर्द में ही सब्र मिला।
इश्क ने जब तोड़ा मुझे
तब जाके मेरा खुदा मिला।
रूह रोई तो रब मिला।
आंसुओं में ही सुकून मिला।
टूटे दिल ने ये सीख लिया।
रब के बिना कुछ भी ना मिला।
जब दुनिया ने छोड़ा हाथ मेरा
तब रब ने थामा।
दिल मेरा जिसे सबसे बड़ा नुकसान समझा
वही तो सबसे बड़ा हासिल था।
जिस दिन तुझसे दूर हुआ
उसी दिन खुद से करीब हुआ।
इश्क से रब तक का जो रास्ता है
वो दर्द से ही शुरू हुआ।
रूह रोई तो रब मिला।
खामोशी में जवाब मिला।
जो इश्क में हार गया था
वो सजदे में जीत गया।
रूह रोई तो रब मिला।
टूट के भी दिल संभल गया।
अब किसी से कोई गिला नहीं
क्योंकि रब मुझे मिल गया।
जिसे खोकर सब कुछ खोया लगा।
उसे खोकर ही सब कुछ पाया।
रूह रोई और उसी रोने में रब मिल गया।
हमने खुद को तेरे नाम कर दिया लिरिक्स – कवाली
राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ गुरु के सम हरि को